सर्वे भवन्तु सुखिन:
सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दु:खभाग भवेत् ।।
सभी सुखी होवें,
सभी रोगमुक्त रहें,
सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें,
किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े
iii. Swastika - स्वस्तिकासन
Technique:-स्वस्तिकासन - स्वस्तिकासन के विषय में शास्त्र में कहा है - कि जानु और जंगा मध्य स्थल में दोनो पादतलों को भली प्रकार स्थापित करके ग्रीवा, मस्तक और मेरुदण्‍ड को सीधा करके बैठने से स्वस्तिकासन बन जाता है ।
योगसार में यह लक्षण दिया है। फिर दोनों बाहुओं को फैलाकर 'ज्ञान-मुद्रा' लगाकर घुटनों पर रख लें । पाँव बदल करके भी यथा सम्भव इसका अभ्यास करना चाहिए ।
Benefit:-लाभ - इस सुगम, सुखद, सुकर आसन से देर तक सुख पूर्वक बैठकर प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का अभ्यास किया जा सकता है । इससे योगसद्धि भी शीघ्र मिलती है ।
जिन साधकों को 'सिद्ध' तथा 'पद्मासन' कठिन प्रतीत होता हो वे इस आसन को अपने अभ्यास के लिए अपना सकते हैं ।